मर रहा जो मेरे अंदर जी उठा है
जानता हूँ इस
में रब की भी रज़ा है
एक ही से हैं परेशाँ हम मगर
देखने जाएँ तो हर नेता गधा है
सोचता हूँ मैं अकेले में मुझे
दोस्ती करने से आख़िर क्या मिला है
बात जो उस सेे हुई तो ये लगा
मेरे भीतर कोई तो फिरसे हँसा है
सारी यादें जल गई उस आग में
मेरा दिल बरसात में कुछ यूँँ जला है
उसको क्या करना है इस संसार से
ये 'सनम' तो शिव की भक्ति में रमा है
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