mar raha jo mere andar jee utha hai | मर रहा जो मेरे अंदर जी उठा है

  - Sanskar 'Sanam'

मर रहा जो मेरे अंदर जी उठा है
जानता हूँ इस
में रब की भी रज़ा है

एक ही से हैं परेशाँ हम मगर
देखने जाएँ तो हर नेता गधा है

सोचता हूँ मैं अकेले में मुझे
दोस्ती करने से आख़िर क्या मिला है

बात जो उस सेे हुई तो ये लगा
मेरे भीतर कोई तो फिरसे हँसा है

सारी यादें जल गई उस आग में
मेरा दिल बरसात में कुछ यूँँ जला है

उसको क्या करना है इस संसार से
ये 'सनम' तो शिव की भक्ति में रमा है

  - Sanskar 'Sanam'

Dost Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Sanskar 'Sanam'

As you were reading Shayari by Sanskar 'Sanam'

Similar Writers

our suggestion based on Sanskar 'Sanam'

Similar Moods

As you were reading Dost Shayari Shayari