दिल में जो उठता है वो तूफ़ान क्या हैजानती हूँ इश्क़ में नुक़सान क्या हैख़त लिए भेजा है तुझ को इक कबूतरबोल इस गुस्ताख़ी का चालान क्या है— Sanskriti Shree