एक कहानी अब हम साझा करते हैं
छुप के कैसे चाँद को देखा करते हैं
श्यामा को राधा जी जैसे प्यारी थीं
वैसे ही हम तुझको चाहा करते हैं
मेला में ग्राहक खोजे कुल्फ़ी वाला
वैसे ही हम तुमको खोजा करते हैं
जानाँ हम से तुम भी वैसे खेलो ना
गेंदस जैसे बच्चे खेला करते हैं
बचपन में हम कैसे झगड़ा करते थे
आओ फिर से यादें ताज़ा करते हैं
याद तुम्हारी आती है तो क्या बोलें
कैसे छत पे छुप के रोया करते हैं
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