खड़ा हूँ आप के मैं द्वार दिनकर

करें जीवन मेरा उद्धार दिनकर

सवेरा ज़िंदगी में हो सभी के
सभी के स्वप्न हो साकार दिनकर

हिमालय पर तेरी पहली किरण यूँ
कि मानो भाल पर श्रृंगार दिनकर

जो करता कर्ण सा पूजन तुम्हारा
रहे ख़ुशहाल वो घर-वार दिनकर

यहाँ रौशन तुम्हारी ज्योति से है
ये कलियाँ फूल पत्ते ख़ार दिनकर

हमारी ज़िंदगी उलझी भँवर में
बचा लो बन के तुम पतवार दिनकर

सजाकर घाट 'सागर' आस में है
उदित हो जा मेरे सरकार दिनकर

— Santosh sagar

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Ummeed Shayari

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