किसी को फिर हँसाया जा रहा है
किसी को फिर रुलाया जा रहा है
किसी के घर को चकनाचूर कर के
किसी का घर बसाया जा रहा है
कहीं है यार मंज़र मातमों का
कहीं पर गीत गाया जा रहा है
जिसे आता नहीं है इश्क़ करना
उसी पर दिल लुटाया जा रहा है
हमारे प्यार में थी क्या कमी जो
हमारा दिल दुखाया जा रहा है
हमें भी देख लो ना यार सागर
हमें कितना सताया जा रहा है
— Santosh sagar















