सोच रहे हैं इस

में क्या हैरानी है
प्यार किया है इस
में जाँ तो जानी है

उन से पूछो जिन के सपने टूटे हैं
मोती है या फिर आँखों में पानी है

जिस रिश्ते का अंत जुदाई लिक्खा हो
उस को आगे ले जाना नादानी है

जब चाहे वो आते हैं चल जाते हैं
मेरे घर में भी उन की मन-मानी है

श्याम की राहें देख रही है कलयुग में
पागल है या सच में वो दीवानी है

भँवरा कैसे फूलों से मिलने जाए
बाग़ों में तो माली की निगरानी है

बोल रही थी ठीक तुम्हारे जैसा है
देखें हम भी कौन हमारा सानी है

माँ-बेटी में अनबन होती रहती है
सागर हर रिश्ते में खींचा-तानी है

— Santosh sagar

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