उसे इस वक़्त इस महफ़िल में होना चाहिए था ख़ैर
मुहब्बत में अना को दिल से खोना चाहिए था ख़ैर
बिछड़ते वक़्त उसकी आँख में कुछ भी नहीं देखा
उसे दो पल तो पलकों को भिगोना चाहिए था ख़ैर
मुझे मसरूफ़ लम्हों ने कही फ़ुर्सत की सच्चाई
उसे बस एक अच्छा सा खिलौना चाहिए था ख़ैर
मेरे क़िस्सों में सुनकर नाम उसका लोग हँसते थे
उसे इस बात पर थोड़ा तो रोना चाहिए था ख़ैर
मेरे दिल की तसल्ली के लिए तस्वीर भेजी है
तुम्हें इस वक़्त मेरे पास होना चाहिए था ख़ैर
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