दूर मिरी जाँ तुझ सेे रहकेबीते हैं दिन पूछो कैसे?इश्क़-मुहब्ब्त तो नामुम्किनबातें ही हों जैसे तैसेनज़्में-वज़्में हो जाती हैंशे'र लिखूँ तो बोलो कैसे?दिन में तारे छुपते फिरतेचाँद चमकता जैसे तैसे— Lokesh Vashishtha