उन लम्हों को भूल गए तुम
उन वादों को भूल गए तुम
उन अपनों के आने पर फिर
इन अपनों को भूल गए तुम
अपना काम निकल जाने पर
फिर रिश्तों को भूल गए तुम
सारी दुनिया याद रही पर
कुछ लोगों को भूल गए तुम
ऐसी भी क्या मजबूरी थी
जो सपनों को भूल गए तुम
— Sarvjeet Singh
उन वादों को भूल गए तुम
उन अपनों के आने पर फिर
इन अपनों को भूल गए तुम
अपना काम निकल जाने पर
फिर रिश्तों को भूल गए तुम
सारी दुनिया याद रही पर
कुछ लोगों को भूल गए तुम
ऐसी भी क्या मजबूरी थी
जो सपनों को भूल गए तुम
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