"आज फिर"
आज फिर तेरा चेहरा दिखा
आज फिर दिल में उम्मीद जगी
आज फिर तुझ से बात करने की
मेरे दिल में इक रीझ जगी
पर बोल न पाया कुछ भी मैं
आज फिर मैं चुप-चाप रहा
आज फिर तुझ से बातें बयाँ करने का
ख़्वाब बस इक ख़्वाब रहा
तेरे चेहरे को भी उतना जी भर के देख न पाया
आज फिर मेरे दिल ने आँखों को बहुत उकसाया
पर बातें बयाँ हुई न और आँखें चुप-चाप रही
आज फिर वही पहले जैसी बेस्वादी मुलाक़ात रही
— Sarvjeet Singh















