रोग दिल का बड़ा ही सरकश है
ये सितम नाज़-ए-तर्ज़-ए-महवश है
है नज़र शोख़ की मेरे दिल पर
और हाथों में उस के तरकश है
राज़ हस्ती के ये ख़ुदा जाने
कौन सूफ़ी है कौन मयकश है
राज़ मजनू ने ये कहा सब से
हाए उल्फत बड़ी ही सरकश है
है तिलावत में कैफ़ किस दर्जा
आज मस्जिद में कोई मयकश है
है नुमाया जो अक्स परदे में
ये नज़ारा भी ख़ूब दिलकश है
— Shadan Ahsan Marehrvi















