आरज़ू जब उफ़ान पर आई
बात दिल की ज़बान पर आई
आज फिर ढूँढ़ते हुए मुझ को
याद उस की मकान पर आई
जान का मोल कुछ नहीं समझा
बात जब आन बान पर आई
ज़ेहन ओ दिल में ज़हर समाया था
और तोहमत ज़बान पर आई
हर ज़रूरत पहाड़ है अब तो
उम्र जबसे ढलान पर आई
— Shakir Dehlvi
बात दिल की ज़बान पर आई
आज फिर ढूँढ़ते हुए मुझ को
याद उस की मकान पर आई
जान का मोल कुछ नहीं समझा
बात जब आन बान पर आई
ज़ेहन ओ दिल में ज़हर समाया था
और तोहमत ज़बान पर आई
हर ज़रूरत पहाड़ है अब तो
उम्र जबसे ढलान पर आई
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