आसमाँ जब ज़मीं पे बैठ गया
जो जहाँ था वहीं पे बैठ गया
कुछ सितारे ज़मीं पे रौशन थे
मैं भी जा कर वहीं पे बैठ गया
इक कबूतर ख़याल का तेरे
उड़ के आया जबीं पे बैठ गया
बल्लियों कूदता उछलता दिल
आप की इक नहीं पे बैठ गया
मुफ़्त में दे दिया मकान-ए-दिल
जब भरोसा मकीं पे बैठ गया
— Shakir Dehlvi















