मेरे लब पे गिला नहीं होता
गर वो मुझ से जुदा नहीं होता
धड़कनों ने भी ये तसल्ली दी
वक़्त किस का बुरा नहीं होता
कर ही लेता जहाँ को मुट्ठी में
गर वो अपना मरा नहीं होता
सच कभी सामने नहीं आता
गर कोई आइना नहीं होता
आइना देख ये कहे शाकिर
कोई इंसाँ बुरा नहीं होता
— Shakir Sheikh















