तेरी महफ़िल में बुलवाया गया हूँ
मैं आया तो नहीं लाया गया हूँ
किया जिन पे भरोसा मैं ने यारों
उन्हीं के दर से ठुकराया गया हूँ
ख़ता इस
में थी मेरी क्या ख़ुदाया
मैं बहका ख़ुद कि बहकाया गया हूँ
मुझे सूली पे चाहे तुम चढ़ा दो
मैं झूठा हूँ कि झुटलाया गया हूँ
— Shakir Sheikh















