भीड़ में इक दिन खो जाऍंगेहम बेगाने हो जाऍंगेऔर ज़ियादा ज़ुल्म हुआ तोसहते सहते रो जाऍंगेजागते जागते देखना इक दिनगहरी नींद में सो जाऍंगेवक़्त तो वक़्त है हम तुम इक दिनआगे-पीछे हो जाऍंगेतुम बस हँसते रहना और हमइस के बदले रो जाऍंगे— shampa andaliib