teergii men kuchh nahin bas teergii hai | तीरगी में कुछ नहीं बस तीरगी है

  - shampa andaliib

तीरगी में कुछ नहीं बस तीरगी है
घर के बाहर देख कितनी रौशनी है

एक जैसे सुख हैं सब के और दुख भी
जो तुम्हारी वो हमारी ज़िंदगी है

एक वो है एक वो है एक वो उफ़
और किस किस से तुम्हारी दोस्ती है

ये अगर मैं भी नहीं तो कौन है फिर
आइने में कौन मुझ पर हँस रही है

सीधी सादी बात है गर कोई समझे
दोस्त दुश्मन आदमी का आदमी है

पहले जैसा कुछ नहीं इस दौर में अब
हर किसी को हर कोई अब अजनबी है

  - shampa andaliib

Aawargi Shayari

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