सभी यादें भुला दीं यूँँही मैं ने
बुझी आँखें रुला दीं यूँही मैं ने
बहुत जागा किया मैं एक दिन फिर
कई रातें सुला दीं यूँही मैं ने
तेरी हर बात सोची समझी चाही
सभी बातें भुला दीं यूँही मैं ने
ग़ज़ल के इस कठिन झूले में यारो
बहुत यादें झुला दीं यूँही मैं ने
— Shantanu Sharma















