दिल दुखाना तो मुहब्बत का पुराना काम है
बे-वफ़ा शायद तुम्हारा ही पुराना नाम है
वो मुहब्बत नाम ले कर क़त्ल भी करते रहे
हम क़तीलों पे ही अब तो क़त्ल का इल्ज़ाम है
चुप अगर होते तो कैसे राह में जान-ए-जिगर
ये मुहब्बत चीज़ ने अब कर दिया बदनाम है
कौन जीता इश्क़ की बाज़ी लगा कर तुम कहो
जो था जीता आज वो 'साहिर' यहाँ ऐताम है
— Sahir banarasi















