एक ग़म भुलाने के लिए शराब पी ली है
कुछ न याद आने के लिए शराब पी ली है
रात तो फ़िराक़ में गुज़ारनी थी हम को फिर
दर्द ये उठाने के लिए शराब पी ली है
ज़ख़्म ला-इलाज है या कोई है इलाज अब
दिल को ये बताने के लिए शराब पी ली है
ख़ुश हैं तेरी हम जुदाई से सभी को ये लगे
वहम ये दिलाने के लिए शराब पी ली है
दोस्ती में जो कभी कभी शराब पीते थे
दुश्मनी निभाने के लिए शराब पी ली है
— Sahir banarasi















