vaise to ha | वैसे तो हमें अपनी ज़िन्दगी से कुछ ख़ास गिला नहीं

  - Shashank Tripathi

वैसे तो हमें अपनी ज़िन्दगी से कुछ ख़ास गिला नहीं
ये अलग बात है हमने जो चाहा वो कुछ भी मिला नहीं

पौधे बहुत लगाए थे बाग ए गुलज़ार में हमने मगर
हमारी ख़ुशियों का फूल एक भी खिला नहीं

ज़ख्म इतने मिलते रहे कि सब नासूर हो गए हैं
वक़्त के धागों ने भी उन ज़ख्मों को सिला नहीं

चंद लम्हों के लिए लबों पर हसीं लाया था इक शख़्स
कि वो शख़्स हमारी यादों से अब तक हिला नहीं

खैर सारा आ
समाँ नाप लेंगे एक दिन हम "निहार"
ये हौसलों की उड़ान है, कोई रेत का किला नहीं

  - Shashank Tripathi

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