बदला जो वक़्त गहरी रफ़ाक़त बदल गईसूरज ढला तो साए की सूरत बदल गईइक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहाफिर यूँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई— Shaukat Fehmi