मेरी ज़िन्दगी का सहारा किताबें

नदी हूँ मैं , मेरा किनारा किताबें

कई काग़ज़ों पे खिले फूल ख़ुद ही
कि जिस रोज़ मैं ने पुकारा किताबें

— karan singh rajput

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