aisa sabke saath aqsr hota hai | ऐसा सबके साथ अक़्सर होता है

  - Shivang Tiwari

ऐसा सबके साथ अक़्सर होता है
दिल में अनजाना सा इक डर होता है

ज़िन्दगी से कोई शश्दर होता है
सरकशी में कोई ख़ुद सेर होता है

चार दिन की ज़िन्दगी है ये मगर
ख़्वाहिशों का लाव-लश्कर होता है

है तमन्ना हँस के गुज़रे ज़िन्दगी
क्योंकि ग़म का दौर दूभर होता है

जीना है तो मौत से डरना ही क्यूँ
जो नहीं डरता सिकंदर होता है

जिसने समझी हो फ़क़त रूहानियत
इक वही इंसान बेहतर होता है

बस जियो ज़िन्दादिली से ज़िन्दगी
मौत का दिन तो मुकर्रर होता है

  - Shivang Tiwari

Khudkushi Shayari

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