तुमको छूकर ही हवाएँ फिरें बहकी बहकी
बाग़ में खिलती ये कलियाँ सभी महकी महकी
काली-काली ये घटाएँ हैं ज़मीं पे उतरी
छेड़े बुलबुल भी तराने, लगे चहकी चहकी
हुस्न पे आई जवानी बड़ी क़ातिल-क़ातिल
बाहों में तेरी ख़िज़ाँ भी लगे लहकी लहकी
लम्स पाकर के बदन का तेरे बेक़ाबू हुआ
मेरी हर साँस मोहब्बत में है दहकी दहकी
नहीं ये हाल दिवाने का मोहब्बत में तेरी
ज़मीं क्या आसमाँ हर शय लगे बहकी बहकी
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