'गुनाह क्या था'
जकड़ लिया मुझे कुछ बंदिशों ने
झकझोर दिया मन को रंजिशों ने
बर्बाद कर दिया तेरी साजिशों ने
पूछता हूँ मेरा गुनाह क्या था
जला हूँ दिन रात विरह की तपन में
ज़िंदा हूँ पर पैर रहे हैं मेरे कफ़न में
पानी भी नहीं डाला देख जलन में
पूछता हूँ मेरा गुनाह क्या था
पाक थी मोहब्बत कोई दोष न था
तुम से मिल कर यार मुझे होश न था
पूछता हूँ मेरा गुनाह क्या था
— Shivang Tiwari















