
चश्म-ए-जानाॅं के सिवा क्या है यहाँ मेरे लिए
कू-ए-जानाॅं के सिवा क्या है ठिकाना मेरा
बा'द तेरे भी मिला यूँ तो मोहब्बत का मज़ा
तेरे बिन दिल किसी शय से भी न माना मेरा
— Vish
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