है प्रभु चरणों में कितना सुख अभी समझा नहीं होगा

जो उस
में प्रेम रघुवर के लिए उपजा नहीं होगा

अधर पर उर में नयनों में सदा ही राम बसते हैं
उपासक राम का हनुमान के जैसा नहीं होगा

हरे जो कष्ट हरि के भी कहाए वीर बजरंगी
मेरे आराध्य के जैसा कोई दूजा नहीं होगा

दिवस तो सात हैं और सात के सातों अनोखे हैं
मगर सातों दिवस में कोई मंगल सा नहीं होगा

— Sani Singh

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