besakhta shamsheer palat myaan men aayi | बेसाख़्ता शमशीर पलट म्यान में आई

  - Siraj Faisal Khan

बेसाख़्ता शमशीर पलट म्यान में आई
गुलदस्ते लिए फ़ौज वो मैदान में आई

इल्हाम उतरता है पयम्बर पे किसी ज्यूँँ
चाहत तेरी ऐसे दिल-ए- वीरान में आई

कुछ राज़ सिवा रब के नहीं जानता कोई
हर बात नहीं खुल के है क़ुरआन में आई

गलियों से गुज़रते हुए चौंक उठता हूँ अक्सर
जैसे तेरी आवाज़ मेरे कान में आई

अब जा के कहीं ऑन हुआ फ़ोन किसी का
अब जा के कहीं जान मेरी जान में आई

लहजा हुआ तुलसी का मेरे खुरदरा कैसे
तल्ख़ी ये भला क्यूँँ मेरे रसखान में आई

नाक़िद तू कहेगा मुझे शागिर्द बना लें
ये शाइरी जिस दिन तेरे संज्ञान में आई

  - Siraj Faisal Khan

Baaten Shayari

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