देगा कब रास्ता दरिया मुझ को

मार डालेगा ये सदमा मुझ को

राम के देश से लाया था वो
दे नहीं पाया जो तोहफ़ा मुझ को

ख़ाक होगा ये तकब्बुर मेरा
मार डालेगा ये कर्ज़ा मुझ को

बेल उस दर कि बजा आया मैं
रह गया तकता दरीचा मुझ को

आया हैं काला पहन कर वो तो
था किया पीले का वा'दा मुझ को

गिर गया ख़ून मिरा हैं इस पर
जेल भेजेगा ये असला मुझ को

चेहरा तक देखा नहीं है उस का
जिस कँवल ने दिया कुर्ता मुझ को

— Sohaib Alvi

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Nadii Shayari

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