jis din se ham ne dekha hai tere shabaab ko | जिस दिन से हम ने देखा है तेरे शबाब को

  - Sohil Barelvi

जिस दिन से हम ने देखा है तेरे शबाब को
कुछ और ही निगाह से देखा शराब को

उलझे हुए हो किस लिए सफ़्हों में जान-ए-मन
जब पढ़ लिया है आप ने दिल की किताब को

दिल ने तेरे लबों का तसव्वुर ही बस किया
होठों से दूर कर दिया हम ने गुलाब को

भँवरों ने फूल छोड़ के देखा है इस तरह
गोया तरस रहे हों तुम्हारे जवाब को

अच्छा हुआ ज़मीं पे गिरे मुँह के बल हबीब
उजलत में पी ही लेते वगरना सराब को

गुलशन से ख़ुशबू जाने लगी है ख़िज़ाँ की सम्त
कुछ इस अदास तकने लगे वो गुलाब को

  - Sohil Barelvi

Gulshan Shayari

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