zara door j | ज़रा दूर जाना नहीं चाहता है

  - Sohil Barelvi

ज़रा दूर जाना नहीं चाहता है
कोई भी ठिकाना नहीं चाहता है

करे है कोई चारागर चाराजोई
दवा भी खिलाना नहीं चाहता है

हुई जब से वीरान दिल की हवेली
कोई आना जाना नहीं चाहता है

मेरी तरह ये बाम-ओ-दर और घर भी
कोई मुस्कुराना नहीं चाहता है

कई बार झाँसे में आया मगर अब
परिंदा ठिकाना नहीं चाहता है

सुख़न-गोई जिस दिन से रास आई दिल को
ये दुखड़े सुनाना नहीं चाहता है

  - Sohil Barelvi

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