दर्द दिल का मेरे कुछ घटा अंदलीब
कोई नग़्मा मोहब्बत का गा अंदलीब
एक बच्चे सा मन अब मेरा लग गया
डाल से डाल पर फिर से जा अंदलीब
हर कोई बन के सय्याद बैठा यहाँ
बारहा कह रहा लौट आ अंदलीब
आज सहरा में इतनी उदासी है क्यूँँ
आ मेरे पास आ बैठ जा अंदलीब
गाँव से दूर फिर तेरी आग़ोश में
आ के मैं हो गया मुब्तला अंदलीब
सिर्फ़ तू और अर्ज़-ओ-समा ही नहीं
साथ तेरे मैं भी रो रहा अंदलीब
फस्ल-ए-गुल अब के सोहिल फ़ना हो गई
इस बरस हो गई ग़म-ज़दा अंदलीब
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