paintara ye tira ab yaar nahin chal saktaa | पैंतरा ये तिरा अब यार नहीं चल सकता

  - Sujata Mottha

पैंतरा ये तिरा अब यार नहीं चल सकता
सिर्फ़ बातों से तो बाज़ार नहीं चल सकता

बस यही सोच के हर बार वो हदस गुज़रा
कि मिरे हाथ से हथियार नहीं चल सकता

पाँव अपने भी ज़रा आज़मा अंगारों पर
आग पर में ही तो हर बार नहीं चल सकता

ये अना तेरी ले डूबेगी तअल्लुक़ अपना
देख ऐसे कभी परिवार नहीं चल सकता

पलकों के पीछे हसीं ख़्वाब की इक दुनिया है
क्या मिरे साथ तू उस पार नहीं चल सकता

  - Sujata Mottha

Khuddari Shayari

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