दश्त-ए-तन्हाईबादलहवाऔरमैं
रोज़ओशबकायहीसिलसिलाऔरमैं
अजनबीरास्तोंपरभटकतेरहे
आरज़ूओंकाइकक़ाफ़िलाऔरमैं
दोनोंउनकीतवज्जोहकेहक़दारहैं
मुझपेगुज़राथाजोसानेहाऔरमैं
सैकड़ोंग़ममिरेसाथचलतेरहे
जिसकोछोड़ाउसीनेकहाऔरमैं
रौशनीआगहीऔरज़िंदा-दिली
इनहरीफ़ोंसेथावास्ताऔरमैं
देरतकमिलकेरोतेरहेराहमें
उनसेबढ़ताहुआफ़ासलाऔरमैं
जबभीसोचातोबससोचतारहगया
ज़िंदगानीतिरामरहलाऔरमैं
तंज़दुश्नामलानतअदावतहसद
इनरफ़ीक़ोंकासायारहाऔरमैं