वो किसी की, रात रौशन कर रहा है
आज करलें ख़ुद-कुशी, मन कर रहा है
मैं बनाना चाहता हूँ दोस्त उस को
शे'र कह कर वार दुश्मन कर रहा है
कल बड़ी क़ीमत चुकायेगी जवानी
भूल छोटी आज बचपन कर रहा है
ज़िन्दगी की रेल मुफ़लिस यूँ चलाता
ख़ून को अपने वो ईंधन कर रहा है
साथ उस के बस बनेगा हम-सफ़र ही
साथ मेरे जो ख़ुदा बनकर रहा है
— Tanoj Dadhich















