होती अगर न कोई गवाही मेरे ख़िलाफ़
फिर भी अमीर-ए-शहर तो था ही मेरे ख़िलाफ़
लोगों ने मेरे हक़ में बहुत कुछ कहा मगर
उस ने जो जो सुना वो सुना ही मेरे ख़िलाफ़
यूँ ही नहीं पड़ी है दरारें फ़सील में
लड़ते रहे हैं मेरे सिपाही मेरे ख़िलाफ़
— Tariq Naeem
फिर भी अमीर-ए-शहर तो था ही मेरे ख़िलाफ़
लोगों ने मेरे हक़ में बहुत कुछ कहा मगर
उस ने जो जो सुना वो सुना ही मेरे ख़िलाफ़
यूँ ही नहीं पड़ी है दरारें फ़सील में
लड़ते रहे हैं मेरे सिपाही मेरे ख़िलाफ़
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