मेरे ख़याल की दुनिया मेहेकने लगती है
फ़लक से मुझ पे ग़ज़ल जब उतरने लगती है
मेरे लहू में उतर आई हैं तेरी यादें
तुझे भुलाऊं तो हस्ती बिखरने लगती है
— Tariq Faiz
फ़लक से मुझ पे ग़ज़ल जब उतरने लगती है
मेरे लहू में उतर आई हैं तेरी यादें
तुझे भुलाऊं तो हस्ती बिखरने लगती है
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