मुझे सवाल के अंदर छुपा जवाब मिला

ज़रा सी नींद खंगाली तो मुझ को ख़्वाब मिला

मेरे सवाल पे उस ने फ़क़त उठाई नज़र
मुझे जवाब मिला भी तो लाजवाब मिला

उसे मिलूँ भी तो लगता नहीं मिला हूँ उसे
अजीब शक़्स है जैसे कोई सराब मिला

शराब कहते हैं अहल-ए-सुख़न नज़र को भी
मेरी शराब में आजा तेरी शराब मिला

करम ख़ुदा का रहा मुझ पे इस तरह के मुझे
चराग़ ढूँढ़ने निकला तो आफ़ताब मिला

— Tariq Faiz

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