होते हैं ज़माने पे अयां और तरह के
दिल पर हैं मोहब्बत के निशां और तरह के
दुनिया को समझ रक्खा था कुछ और ही हम ने
होते हैं तजुर्बे तो यहाँ और तरह के
दुनिया कि शराब और है जन्नत कि शराब और
नश्शे हैं यहाँ और वहाँ और तरह के
— Tariq Faiz
दिल पर हैं मोहब्बत के निशां और तरह के
दुनिया को समझ रक्खा था कुछ और ही हम ने
होते हैं तजुर्बे तो यहाँ और तरह के
दुनिया कि शराब और है जन्नत कि शराब और
नश्शे हैं यहाँ और वहाँ और तरह के
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