bas ek baar sahi mujhko tu pukaar zaraa | बस एक बार सही मुझको तू पुकार ज़रा

  - Tariq Faiz

बस एक बार सही मुझको तू पुकार ज़रा
मेरे गुमां को हकी़कत में भी उतार ज़रा

नज़र का तीर तेरी मुझको आज़माना है
लगा निशाना मेरे दिल के आर–पार ज़रा

सुकूं मिलेगा तुझे मेरे ही कहीं अंदर
तु मेरी रूह में कुछ लम्हे तो गुज़ार ज़रा

न हो जो जि़क्र तेरा फ़िर मेरी ग़ज़ल कैसी
मेरे ख़याल में आजा ग़ज़ल संवार ज़रा

  - Tariq Faiz

Nazar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Tariq Faiz

As you were reading Shayari by Tariq Faiz

Similar Writers

our suggestion based on Tariq Faiz

Similar Moods

As you were reading Nazar Shayari Shayari