पायल कभी पहने कभी कंगन उसे कहना
ले आए मुहब्बत में नयापन उसे कहना
मयकश कभी आँखों के भरोसे नहीं रहते
शबनम कभी भरती नहीं बर्तन उसे कहना
घर-बार भुला देती है दरिया की मुहब्बत
कश्ती में गुज़ार आया हूँ जीवन उसे कहना
इक शब से ज़ियादा नहीं दुनिया की मसेरी
इक शब से ज़ियादा नहीं दुल्हन उसे कहना
रह रह के दहक उठती है ये आतिश-ए-वहशत
दीवाने है सहराओं का ईंधन उसे कहना
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