हाल-ए-दिल मेरा पता करके
रो पड़ा वो ख़ुदा ख़ुदा करके
बड़ा पछताए हम वफ़ा करके
तुम भी पछताओगे दगा करके
हम को अपनी क़सम मोहब्बत में
कुछ न हासिल हुआ वफ़ा करके
उसको इक रोज़ खो दिया हम ने
जिसको पाया बहुत दुआ करके
हम को भी अब सुकून मिलता है
तेरे जैसो से जाँ ज़फा करके
क्या मिलेगा भला किसी को दोस्त
मेरे इन ज़ख़्मों को हरा करके
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