रास्ता कोई खोजना होगा
तब कहानी में कुछ नया होगा
ऐसे मंज़िल नहीं मिलेगी दोस्त
पहले घर बार छोड़ना होगा
एक दिन मर के देखना है मुझे
मैं अगर मर गया तो क्या होगा
कोई मन्नत क़ुबूल तब होगी
जब कहीं पे कोई ख़ुदा होगा
मेरी मंज़िल ही मुझ से रूठी है
अब भला रास्ते का क्या होगा
बंद है उस के दिल का दरवाज़ा
दोस्त मयख़ाना तो खुला होगा
फिर मेरे पास लौट आई वो
जाने अब किस का दिल दुखा होगा
आज ख़ुशियों से भर गया है घर
आज ये ग़म कहाँ छुपा होगा
— ABhishek Parashar















