tumhein itnaa ziyaada chahta hooñ | तुम्हें इतना ज़ियादा चाहता हूँ

  - ABhishek Parashar

तुम्हें इतना ज़ियादा चाहता हूँ
कि होना फ़िर से बच्चा चाहता हूँ

बता दूँगा मगर तुम पूछ लेना
कि तुम से जान मैं क्या चाहता हूँ

मुझे गर तुम इजाज़त दो मोहब्बत
तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ

तुम्हें ता-उम्र अपनी जान कह कर
तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ

पकड़ कर हाथ तेरा ज़िंदगी भर
तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ

मुझे ख़ुद भी नहीं मालूम जानाँ
तुम्हें क्यूँँ और कितना चाहता हूँ

कई दिन से नहीं रोया कि आ कर
गले लग जान रोना चाहता हूँ

मिले ग़म से मुझे छुटकारा इतना
मोहब्बत में इज़ाफ़ा चाहता हूँ

ज़माने से मिले जो ज़ख़्म मुझ को
सभी को जान भरना चाहता हूँ

नहीं है ज़िंदगी से अब मोहब्बत
कि मैं तो रोज़ मरना चाहता हूँ

  - ABhishek Parashar

Rahbar Shayari

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