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है सितम ये कि सराबों में मिले हम दोनों - Haider Khan

है सितम ये कि सराबों में मिले हम दोनों
और उसमें भी हिजाबों में मिले हम दोनों

ज़िन्दगी की जो पढ़ाई है उसी के चलते
एक दूजे को निसाबों में मिले हम दोनों

हाँ हकीक़त में मयस्सर न हुए लेकिन फिर
बन के किर्दार किताबों में मिले हम दोनों

आँख खोला तो लगा जाँ भी नहीं बाकी अब
इस क़दर टूट के ख़्वाबों में मिले हम दोनों

दिल लगाने की भी फ़ुर्सत नहीं मिलती है अब
आज ये कैसे अज़ाबों में मिले हम दोनों

- Haider Khan

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