तुम गर नहीं तो क्या हुआ माइल हैं और भी
मेरी हर एक बात के क़ाइल हैं और भी
कब तक कोई सुनेगा तुम्हारी ये दास्ताँ
हर शख़्स के यहाँ पे मसाइल हैं और भी
तुम चार क़दम साथ सफ़र कर के थक गए
इस 'इश्क़ में अभी तो मराहिल हैं और भी
हमने समझ लिया था इरादा फ़िराक़ का
तुमने कहा था जब तेरे काबिल हैं और भी
जब जब चला हूँ राह मैं तेरी तो यूँं लगा
तुझ सेे भी पहले पाने को मंज़िल हैं और भी
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