kisi ki yaad ab dil ko aziyyat lag rahi hai | किसी की याद अब दिल को अज़िय्यत लग रही है

  - Haider Khan

किसी की याद अब दिल को अज़िय्यत लग रही है
उसे अब भूल जाना इक ज़रूरत लग रही है

निकल कर मैं किसी के दिल से ख़ुद में लौट आया
मुझे इस बे-सुकूँ घर में ही राहत लग रही है

कहानी उसकी झूठी थी मगर उसने न जाने
सुनाई किस अदास के हकीक़त लग रही है

मुझे मिलने तू आया और घटाएं छा गईं हैं
मुझे मौसम की ये कोई शरारत लग रही हैं

तुम उसकी बात पर हामी भरा करते हो हर दम
मोहब्बत कम हमें तो ये हुकूमत लग रही है

  - Haider Khan

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