kab tak tujhi ko yaar pukaara kare koi | कब तक तुझी को यार पुकारा करे कोई

  - Haider Khan

कब तक तुझी को यार पुकारा करे कोई
क्यूँ ना तेरे बग़ैर गुज़ारा करे कोई

तुम बस ख़याल ही नहीं मेरा वजूद हो
कैसे बताओ ख़ुद से किनारा करे कोई

हर शख़्स बा-वज़ू हो अदब एहतिराम से
जब भी कहीं पे ज़िक्र तुम्हारा करे कोई

इस चाँदनी में सर्द हवाओं में मेरे साथ
बीता हुआ वो दौर गुज़ारा करे कोई

क्यूँ उठ गया है दिल मेरा दुनिया-जहान से
दुनिया का मेरे दिल से नज़ारा करे कोई

उलझा रखा है तेरे ही ग़म ने अभी तलक
फ़ुर्सत कहाँ कि 'इश्क़ दोबारा करे कोई

हैरत तो तब हो वार कभी ग़ैर जब करे
वर्ना नया ही क्या जो हमारा करे कोई

उठ कर के जा रहा हूँ मगर इंतज़ार है
रुक जाऊँ वो नज़र जो इशारा करे कोई

  - Haider Khan

Dil Shayari

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