ये मेरा दिल है ये दरिया नहीं सहरा होगा
वो भटकता हुआ आकर यहाँ ठहरा होगा
उसके अतराफ़ गुलाबों की महक आती है
तितलियों का दर-ओ-दीवार पे पहरा होगा
दिल को हर रोज़ यही बोल के बहलाता हूँ
आने वाला है वो बस मोड़ पे ठहरा होगा
क्या कहा चांद नज़र आया ज़मीं पर तुमको?
वो कोई चांद नहीं उसका वो चेहरा होगा
उसकी ख़ामोशी से अंदाज़ा हुआ है मुझको
ये समंदर तो मेरी सोच से गहरा होगा
शबनमी आँखों में फैला हुआ काजल ले कर
किस क़दर हिज्र में अफ़्सुर्दा वो चेहरा होगा
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